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Kursi ke aage Sawar

Creator
@thunder_panda_57
Pop2:23September 21, 2026
0:00 2:23

Lyrics

बिहार के माटी से एगो सवाल बा, सवाल छोट नइखे, सवाल पूरा व्यवस्था से बा।
सांसद से पूछीं, विधायक से पूछीं, मंत्री से पूछीं, मुख्यमंत्री से पूछीं—
कुर्सी मिलल बा, त जिम्मेदारी कहाँ बा?
काहे कि जनता के जरूरत भाषण से ना, काम से पूरा होला।
कुर्सी पर बइठल बाड़ऽ, अब काम के हिसाब दऽ, बिहार तोहरा से पूछता— हमरा भविष्य के जवाब दऽ।
स्कूल के सवाल उठी, तो नाम सामने आई— खान सर!
इलाज के सवाल उठी, फिर नाम सामने आई— खान सर!
मुसीबत में मदद के बात हो, फिर देखऽ— खान सर!
त सवाल ई नइखे कि कौन बड़ा, कौन छोट...
सवाल ई बा— जिसके पास सत्ता बा, ऊ जनता खातिर का करत बा?
नेता जी, बताईं—
गाँव के स्कूल में बच्चा पढ़ता कैसन बा?
मास्टर पूरा बा कि ना? पढ़ाई के माहौल कैसन बा?
गरीब के बेटा अफसर बने के सपना देखता— उसके सपने तक अच्छी शिक्षा पहुँचता कि ना?
काहे कि शिक्षा सिर्फ भवन बनावे के नाम ना हऽ, शिक्षा मतलब— बच्चा समझे, सीखे, आगे बढ़े के मौका पावे।
अब देखीं खान सर के तरफ—
मुश्किल विषय के आसान भाषा में समझावे के काम, प्रतियोगी परीक्षा के तैयारी, कम लागत में पढ़ाई पहुँचावे के प्रयास।
अब नेता जी, गुस्सा मत होइहऽ— सवाल बस एतना बा:
आपके पास शिक्षा विभाग बा, बजट बा, व्यवस्था बा—
त गरीब के बच्चा के अच्छी पढ़ाई कब मिली?
कुर्सी पर बइठल बाड़ऽ, अब काम के हिसाब दऽ, बिहार तोहरा से पूछता— हमरा भविष्य के जवाब दऽ।
बात हवा में मत उड़ा, बात जमीन पर ला, बिहार के नौजवान के भविष्य के रास्ता बना।
अब स्वास्थ्य के बात करीं—
नेता जी, बताईं—
गरीब आदमी बीमार पड़े, त इलाज के पैसा कहाँ से लाई?
बुनियादी जाँच के खर्च अगर परिवार के बजट हिला दे, त गरीब आदमी बीमारी से लड़े कि खर्चा से?
यही जगह पर खान सर के अस्पताल का उदाहरण सामने आता है।
पटना में उनके नाम से चल रहे अस्पताल के बारे में रिपोर्टों में कम लागत वाली जाँचों का उल्लेख है।
अब सवाल फिर वही—
अगर एक व्यक्ति कम लागत में स्वास्थ्य सेवा का मॉडल खड़ा करने की कोशिश कर सकता है, तो सरकार के पास तो पूरा स्वास्थ्य तंत्र है।
फिर सरकारी अस्पताल में गरीब को बेहतर सुविधा देने के लिए और कितना इंतजार?
ये तारीफ का सवाल ना हऽ, ये व्यवस्था के स्तर का सवाल हऽ।
बिहार में बाढ़ आई, घर डूबल, सामान डूबल, कई परिवार सड़क पर आ गइल।
तब सवाल उठा— मुसीबत में कौन खड़ा बा?
सरकार भी राहत पहुँचाती है, क्योंकि आपदा में सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी होती है।
लेकिन उसी संकट में खान सर भी राहत अभियान लेकर सामने आए।
करीब 100 गाड़ियों के काफिले में खाने-पीने और जरूरी सामान भेजे गए, और रवाना करने से पहले सामान की जाँच भी की गई।
अब देखऽ— यही है असली सवाल।
जिसके पास सरकार बा, वो सरकारी संसाधन से काम करे— ठीक बा।
जिसके पास सरकारी कुर्सी ना बा, वो अपने स्तर पर मदद करे— ई भी समाज के काम बा।
लेकिन नेता जी—
आपके पास जनता के दिए अधिकार भी बा और सरकारी संसाधन भी।
इसलिए जनता पूछेगी—
आपके अधिकार का परिणाम हमारे गाँव तक कब पहुँचेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल— रोजगार!
बिहार का नौजवान डिग्री लेकर घूमता बा।
किसी के हाथ में प्रमाणपत्र, किसी के हाथ में प्रतियोगिता की किताब, किसी के आँख में सपना—
लेकिन सवाल— मौका कहाँ बा?
नेता जी भाषण में नौकरी के बात खूब होला,
लेकिन नौजवान पूछता—
कितना रोजगार बना? कहाँ बना? कब मिला? किसको मिला?
काहे कि नौजवान को सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए—
उसे अवसर चाहिए।
खान सर शिक्षा देकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी का रास्ता खोलते हैं।
लेकिन यहाँ भी असली सवाल सरकार से है—
पढ़े हुए नौजवान के लिए नौकरी और अवसर की व्यवस्था कौन बनाएगा?
इसका जवाब शिक्षक नहीं दे सकता।
इसकी जिम्मेदारी नीति और शासन की है।
ए नेता जी!
हम तोहरा दुश्मन ना हईं, हम जनता हईं।
तहरा से कुर्सी ना माँगतानी, हिसाब माँगतानी।
हम तोहरा नाम ना मिटावतानी, तोहरा काम के नतीजा पूछतानी।
काहे कि—
जनता के वोट पाँच साल के चुप्पी का कागज ना हऽ, जनता के वोट जवाबदेही के जिम्मेदारी हऽ।
खान सर के नेता मत बनाईं, उनका नेता कहके उनका काम छोट मत करीं।
वो शिक्षक हैं— उनका मैदान शिक्षा है।
स्वास्थ्य में पहल है— उसका अपना क्षेत्र है।
बाढ़ में राहत पहुँचाई— वो मानवता का काम है।
उनकी इज्जत इसलिए नहीं कि उनके पास सत्ता है—
इज्जत इसलिए कि जिस क्षेत्र में खड़े हैं, वहाँ कुछ करने की कोशिश दिखती है।
और यही बात हर नेता पर भी लागू होनी चाहिए—
जिस पद पर हो, उस पद का काम दिखना चाहिए।
सांसद हो— तो जनता की आवाज़ उठे।
विधायक हो— तो क्षेत्र की हालत सुधरे।
मंत्री हो— तो विभाग में परिणाम दिखे।
मुख्यमंत्री हो— तो पूरे बिहार में व्यवस्था दिखे।
कुर्सी को सिर्फ कुर्सी मत रहने दो, उसे जिम्मेदारी बना दो।
बच्चे को किताब, युवा को रोजगार, गरीब को इलाज, मुसीबत में सहारा—
यही बिहार का असली श्रृंगार।
खान सर से तुलना नाम के लिए मत करना—
काम के लिए करना।
और नेता से सवाल नफरत में मत करना—
जिम्मेदारी के लिए करना।
क्योंकि अंत में—
बिहार किसी एक आदमी का नहीं, बिहार करोड़ों लोगों का है।
जिसके पास जितनी ताकत है, उससे उतना ही सवाल है।
बिहार बोले— वादा कम, काम ज्यादा। भाषण कम, परिणाम ज्यादा। नाम कम, जिम्मेदारी ज्यादा।
ई बिहार के जनता के आवाज़ बा।

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thunder_panda_57 is an AI artist on Star Singer that produces Pop music.

What genre is Kursi ke aage Sawar?

Kursi ke aage Sawar is Pop.

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